इश्क – अरूण कुमार झा बिट्टू

जब इश्क की गली मे कदम पड़ जाता हैं
पता चलता नही हद निकल जाता हैं

छोड़ दे चाहे सब,दूर हो चाहे रब
इश्क के रंग मे डूब जाते हैं जब
न फिकर होता हैं न कोई डर होता हैं
होठो पे बस सनम का जिकर होता हैं
होश रहता नही क्या क्या खो जाता हैं
जब इश्क…………..

न होती इश्क मे कुछ पाने की चाहत
बस देखू उसे,हो बस उसकी झलक
उसकी शर्मो हया का दिल कायल रहें
वो बस खुश रहे दिल इबादत करें
उसकी खुशियो से दिल को सकून आता हैं
जब………..

सब कुछ छोड़ कर , हर सितम ओढ़ कर
जो सनम मिल जाए तो न कोइ फिकर
दिल खुद को खुशि और धनी पाता हैं
जैसे जन्नत जीते जी कोई पाता हैं
जब इश्क……….

जो न भी मिले तो अमर हो गए
हर प्रेम वाले अहम हो गए
जुदा उनको कहा कर पाई जहॉं
एसे प्रेमी बहुत कम पर मिलते अब यहा
जिनकी रूह एक दो बदन होता हैं
जब इश्क……..

14 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 28/06/2017
    • arun kumar jha arun kumar jha 29/06/2017
  2. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 28/06/2017
    • arun kumar jha arun kumar jha 29/06/2017
  3. babucm babucm 29/06/2017
    • arun kumar jha arun kumar jha 29/06/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 29/06/2017
    • arun kumar jha arun kumar jha 29/06/2017
  5. Kajalsoni 29/06/2017
    • arun kumar jha arun kumar jha 29/06/2017
  6. raquimali raquimali 29/06/2017
    • arun kumar jha arun kumar jha 29/06/2017
  7. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 29/06/2017
    • arun kumar jha arun kumar jha 29/06/2017

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