…… नहीं होता

कोस कर प्रारब्ध के होना कभी हताश मत ।
परास्त के आयुध में बस दृढ़-कर्म नहीं होता ।।

धनुर्धर अर्जुन के कौशल से ईर्ष्या मत कर हे कौरव ।
ज्ञात हो अभ्यासरत वह गुडाकेश, रातभर नहीं सोता ।

बड़प्पन निरन्तर सहने, चलते रहने और मौन में है ।
सियार-कुक्कुर के जैसे तो सिंह कभी भी नहीं रोता ।।

आकर्षित कर ही लेती है सभी को सदगुणों की सुगंध, वरन ।
रातरानी व चन्दन पर कभी लिपटा भुजंग नही होता ।।

बृहद आकार देखकर गुब्बारे का, न होना भ्रमित ।
उड़ जाता है वो, जिसमे अपना वज़न नहीं होता ।।

15 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 28/06/2017
    • Vivek Singh Vivek Singh 29/06/2017
  2. C.M. Sharma babucm 28/06/2017
    • Vivek Singh Vivek Singh 29/06/2017
  3. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 28/06/2017
    • Vivek Singh Vivek Singh 29/06/2017
  4. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 28/06/2017
    • Vivek Singh Vivek Singh 29/06/2017
  5. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 28/06/2017
    • Vivek Singh Vivek Singh 29/06/2017
  6. arun kumar jha arun kumar jha 28/06/2017
    • Vivek Singh Vivek Singh 29/06/2017
  7. Kajalsoni 28/06/2017
    • Vivek Singh Vivek Singh 29/06/2017
  8. raquimali raquimali 29/06/2017

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