रिश्ता – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा बिन्दु

 

दिल करता है दे दूॅ दिल को

पर मेरा मन डरता है

देख रहा हूॅ दुनिया को अब

प्यार में आहें भरता है।

अक्सर धोका दे जाती है

प्रीत में जो कोई मरता है

दौलत-शौहरत मिल है जाती

पर साथ नहीं कोई जीता है।

दिवानों को कौन बताये

आग में क्यों झुलस्ता है

रिश्ते-नाते टूट है जाते

उर्म भर हाथ मलता है।

मेरा कहना मान लो साथी

दुःख में जो साथ निभाता है

उसको तो अपना लेना तुम

ऑखों को जो कोई भता है।

लोभ-फरेबी से दूर ही रहना

ये तेरे ही दिल को छलता है

मीठी-मीठी बातों में फुसलाकर

अंदर-अंदर से तुमको दलता है।

 

बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा  बिन्दु

12 Comments

  1. Madhu tiwari madhu tiwari 25/06/2017
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 26/06/2017
  2. arun kumar jha arun kumar jha 25/06/2017
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 26/06/2017
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 25/06/2017
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 26/06/2017
  4. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 26/06/2017
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 26/06/2017
  5. C.M. Sharma babucm 26/06/2017
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 26/06/2017
  6. Kajalsoni 28/06/2017
    • Bindeshwar prasad sharma bindeshwar prasad sharma 28/06/2017

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