“तुम” (2)

तुम्हारी मौजूदगी मेरे लिए‎ बड़े मायने रखती है
जब तुम साथ होते हो तो मेरे संग घर की
खामोश दीवारें भी बोल उठती‎ हैं ।

चंचलता की हदें तो तब टूट‎ती हैं
जब समय पंख लगा कर उड़ता और
नाचता सा भागने लगता है ।

तुम्हारी गैर‎ मौजूदगी में आलस
खामोशी की चादर घर और मन के कोनों
की खूटियों पर टांग देता है ।

तब समय थम सा जाता है
सन्नाटा पसर जाता है और
मन भी नीरवता में डूब जाता है ।

XXXXX

“मीना भारद्वाज”

12 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 24/06/2017
    • Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 25/06/2017
  2. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 24/06/2017
    • Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 25/06/2017
  3. babucm babucm 24/06/2017
    • Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 25/06/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 24/06/2017
    • Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 25/06/2017
  5. arun kumar jha arun kumar jha 24/06/2017
    • Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 25/06/2017
  6. Kajalsoni 25/06/2017

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