सदियों से अमर किरदार है हम

सूनी आंखे,   सूखे आंसू,      सेहत से बीमार है हम
ये सब तोहफा है उसका, जिस हूरपरी के यार है हम।

माना के बयाँ कर देना था वो किस्सा मेरे प्यार का जानी,
पर वो थोड़े मगरूर से है,  फिर थोड़े से खुद्दार है हम।

अजब का रिश्ता अपना उनसे, वो सांस से हल्के रूह में रहते,
ओर उनके लिए बस आंख का कंकर, दुनियाभर का भार है हम।

अपना दिल है मस्जिद सा, वो एक ख़ुदा ही रहते है
उनके दिल में रोज बदलते महज किरायेदार है हम।

इक रोज दफा कर ही देंगे हम बंजारों को वो घर से,
बस बोरी बिस्तर बांध के बैठे, जाने को तैयार है हम।

हर जन्म में हम तुम आएंगे,
हर दौर निभाये जाएँगे,
मे कवि एक दीवाना सा, तुम एक रूप की शहजादी,
सदियों से अमर किरदार है हम।
सदियों से अमर किरदार है हम।

13 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 22/06/2017
  2. kanukabir kanukabir 22/06/2017
  3. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 22/06/2017
    • kanukabir kanukabir 23/06/2017
  4. SARVESH KUMAR MARUT SARVESH KUMAR MARUT 22/06/2017
    • kanukabir kanukabir 23/06/2017
  5. Madhu tiwari Madhu tiwari 22/06/2017
    • kanukabir kanukabir 23/06/2017
  6. C.M. Sharma babucm 23/06/2017
    • kanukabir kanukabir 23/06/2017
  7. arun kumar jha arun kumar jha 23/06/2017
    • kanukabir kanukabir 23/06/2017
  8. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 24/06/2017

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