जिदंगी अभी बाकी है

जिदंगी अभी बाकी है, कि
सांस को इंतजार है तेरी दुआ का
आंख को इंतजार है तेरी नज़र का
और रूह को इंतजार हमसफ़र का।

छोड़ आया हुँ जो गजल
अपने तकिये के नीचे छुपाकर,
अधुरी है।
कुछ चेहरों से नाराजी है,
कुछ दिलों के दरम्यान भी
दूरी है।

उस गली का फेरा बाकी है
उजला सा सवेरा बाकी है।
कुछ रोशन किरणें बाकी है
गुमनाम अंधेरा बाकी है।

कुछ गढ्ढे कांटे बाकी है
कुछ ठोकर खाना बाकी है
कुछ तेरी जुल्फ़ों की छाया
कुछ मस्त जवानी बाकी है।

कदमों में सितारे हो मेरे
वो ख्याति पाना बाकी है
में रंगमंच की कठपुतली
लोगों को हसाना बाकी है।

14 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 22/06/2017
  2. kanukabir kanukabir 22/06/2017
  3. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 22/06/2017
    • kanukabir kanukabir 23/06/2017
  4. SARVESH KUMAR MARUT SARVESH KUMAR MARUT 22/06/2017
    • kanukabir kanukabir 23/06/2017
  5. babucm babucm 23/06/2017
    • kanukabir kanukabir 23/06/2017
  6. arun kumar jha arun kumar jha 23/06/2017
    • kanukabir kanukabir 18/08/2017
  7. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 24/06/2017
    • kanukabir kanukabir 18/08/2017
  8. Saviakna Saviakna 24/06/2017
    • kanukabir kanukabir 18/08/2017

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