Agar Maan Li Haar To Jeevan Vyarth hai

अगर मान ली हार तो जीवन व्यर्थ है

सफ़ल होना हो तो अंतिम साँस तक लड़ो
दुनिया बदलनी हो तो उसे गहराई में पढो,
मंज़िल की चाह के बिना आगे बढ़ो
और चाहते हो अगर कुछ पाना , तो डट के अडो

पाना हो कुछ ज़िन्दगी में
तो तरीके बदलो इरादे नहीं
क्योंकि अगर मानी हार
तो मतलब वो चाहिए था ही नहीं
ज़िन्दगी शुरू होती है वहाँ
जहा अंत होता है आराम का
लड़ने के लिए हालतो से
मौका बनाओ एक काम का

तू चल इस कदर कि
जहाँ डाले हाथ वहाँ फाड़ दे
कोई आ जाए सामने
तो उसे पछाड़ दे
घुस जा जंगल में
और यूँ दहाड़ दे
कि डरके धरती अपने अंदर से
निकाल एक पहाड़ दे

यह जीवन दिया है जिसने
दिया इसका कुछ अर्थ है
और अगर मान ली हार
तो जीवन व्यर्थ है

द्वारा – मोहित सिंह चाहर ‘हित’

6 Comments

  1. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 22/06/2017
  2. babucm babucm 22/06/2017
  3. SARVESH KUMAR MARUT SARVESH KUMAR MARUT 22/06/2017
  4. Madhu tiwari Madhu tiwari 22/06/2017
  5. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 22/06/2017

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