‘श्रीराम मेरे ही हैं’ … Raquim Ali

‘श्रीराम मेरे ही हैं’ तू यह कहता है
‘किशन हैं मेरे’ तू यह भी कहता है
‘पावन गंगा मैय्या हैं मेरी
यमुना की जलधार मेरी है’

तू यह कह कर नादान न बन
संभल भी जा शैतान न बन।

मैं तुझको कैसे समझाऊं
मैं तुझे क्या इतिहास सिखाऊं
समझ सको तो समझ लो, अब तुम
मैं तुझसे कुछ कह न पाऊं;

राम-कृष्ण हैं सारे जग के
सबकी हैं गंगा-यमुना
जितने वे तेरे हैं, उतने ही वे मेरे हैं।

न मैंने तुझे ईमान सिखाया
न ही मैंने तुझे क़ुरान पढ़ाया
सही हदीसें क्या होती हैं
मैंने कभी न तुझे बताया;

तुझसे बड़ा नादान तो मैं हूँ
सच पूंछो, शैतान तो मैं हूँ।

मथुरा को अपनाया है तूने
काशी को तुमने बाँट लिया है
मैंने क़ाबा की अज़मत को छुपाया
मैंने भी मुस्तफ़ा को बाँट लिया है;

रहीम-रसूल तो हैं, सारे आलम के
जितने वे मेरे हैं, उतने ही वे तेरे हैं।

मैंने भी कुछ तकसीम किया है
तुमने भी कुछ तकसीम किया है
तुम भी अब तस्लीम करो यह
मैंने भी अब तस्लीम किया है-

मैंने भी एक ज़ुल्म किया है
तुमने भी एक ज़ुल्म किया है।

(तकसीम= divide, तस्लीम= accept)
… र.अ. bsnl

12 Comments

  1. raquimali raquimali 21/06/2017
  2. C.M. Sharma babucm 21/06/2017
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 21/06/2017
  4. raquimali raquimali 21/06/2017
  5. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 21/06/2017
  6. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 21/06/2017
  7. raquimali raquimali 21/06/2017
  8. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 22/06/2017
  9. raquimali raquimali 22/06/2017
  10. SARVESH KUMAR MARUT SARVESH KUMAR MARUT 22/06/2017
  11. raquimali raquimali 22/06/2017

Leave a Reply