लिखू मै भी कुछ

लिखू मै भी कागज पर, जो
हाथों की लकीर बन जाये
गुन गुनाऊँ ऐसा तराना
जो मेरी तकदीर बन जाये

कलम की श्याही ख्वाव बने
कागज की पट्टी विशबास बने
ईरादों को अपने मजबूत करूँ
की सोच मेरी इंकलाब बने
नहीं पता कब क्या हो जाये
मगर सब कागज पर लिखा होगा
आज लिखा जो दुनिया का फसाना
वो कल किसी का इतिहास होगा

लिखू मै भी कुछ कागज पर
जो तेरी तसबीर बन जाये
लिखुं कुछ ऐसा फसाना
मेरे लहू की लकीर बन जाये

4 Comments

  1. babucm babucm 21/06/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 21/06/2017
  3. Saviakna Saviakna 22/06/2017

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