मानता हू जिन्दगी ने मुझे कम दिया- अरूण कुमार झा बिट्टू

मानता हू जिन्दगी ने मुझे कम दिया
पर ये कम है क्या तेरे जैसा सनम दिया
जब भी आई बरसात दर्दे गम का
तेरी प्यार ने हर दर्द को मलहम दिया

नही मकान है संगमरमर से तरासा हुआ
खुरदरी दीवार हैं,बिखरी हैं गरीबी के निशान
पर देखता हू जब हुस्न का तेरे दमकता सोना
तो सोचता हू जिन्दगी ने मुझे क्या कम दिया

तेरे बदन की खुशबू है शांसो मे
एक अटूट प्रेम विश्वास है निगाहो में
कुछ बात कर और बात से कुछ खास कर
इस प्रेम सा नशा नही जमाने में

मानता हू बहुत हैं लोगो के पास
पर प्रेम नही सनम का,जो कर ले मन की बात
तो सोचो उन्हे जिन्दगी ने क्या दिया
उनसे तो अच्छा मै, सनम तुमसा दिया
हॉ उनसे तो अच्छा मैं सनम तुमसा दिया

14 Comments

  1. Vivek Singh 18/06/2017
    • arun kumar jha arun kumar jha 19/06/2017
  2. Madhu tiwari Madhu tiwari 18/06/2017
    • arun kumar jha arun kumar jha 19/06/2017
  3. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 18/06/2017
    • arun kumar jha arun kumar jha 19/06/2017
  4. Kajalsoni 18/06/2017
    • arun kumar jha arun kumar jha 19/06/2017
  5. C.M. Sharma babucm 19/06/2017
    • arun kumar jha arun kumar jha 19/06/2017
  6. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 19/06/2017
  7. arun kumar jha arun kumar jha 19/06/2017
    • arun kumar jha Arun Kumar jha 20/06/2017

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