मैं आम आदमी

शीर्षक -मैं आम आदमी

मैं आम आदमी
सडको की धुल फांकता चलता हूँ
अपने सपनो के लिए
साईकिल के पहियों संग उड़ता चलता हूँ
अभावो के गोद में पलबढ़ कर
खुद को लक्ष्य के लिए प्रेरित करता हूँ
मैं आम आदमी
छोटे से शहर का
डिबिए की रौशनी से
खुद को रौशन करता हूँ
भीड़ में कंधो के ठोकरे खा कर
आगे बस आगे बढ़ते रहता हूँ
ट्रेन में धक्को के सहारे
मंजिल की और बढ़ता हूँ
कभी गिरता हूँ
कभी संभलता हूँ
पैरोे को लड़खड़ाने से रोकता हूँ
मैं आम आदमी की तरह जीता हूँ
आम आदमी की तरह मरना नहीं चाहता
बस इसलिए
लेकर थोड़ी सी उम्मीद
थोडा सा खुद पर विश्वास
करता रहता प्रयास
मैं आम आदमी—-अभिषेक राजहंस

8 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 16/06/2017
  2. arun kumar jha arun kumar jha 16/06/2017
    • Abhishek Rajhans 16/06/2017
  3. Bindeshwar prasad sharma bindeshwar prasad sharma 16/06/2017
    • Abhishek Rajhans 16/06/2017
  4. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 16/06/2017
    • Abhishek Rajhans 16/06/2017
  5. babucm babucm 17/06/2017

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