हक़ीक़तों से आँख तो मिलाएंगे……

खुद मिटेंगे पर किसी को मिटने से बचाएंगे
हम जिंदगी को जिंदगी के मायने बताएँगे

क्या हुआ जो स्वप्न सुनहरे न देख पाएंगे
भोर में हक़ीक़तों से आँख तो मिलाएंगे

सारे दिन की बेबसी से जब लगेंगे टूटने
तान करके भूख की हम चादरें सो जायेंगे

एक नया दर्द मिला थोड़ी देर रो तो लें
भूल जायेंगे इसे तो फिर से गीत गाएंगे

क्या गिला जो उम्र भर हमको नफ़रतें मिलीं
हम जहाँ में सबके लिए प्यार छोड़ जायेंगे

बेबसों के आंसुओं से थोड़ा खौफ खाइये
इनकी आंच से ये सारे ताज पिघल जायेंगे

बना रहे महल तुम्हारे खुद को खाक करके जो
कब तलक कटेंगी इनकी उंगलियां बताइये

5 Comments

  1. SARVESH KUMAR MARUT SARVESH KUMAR MARUT 13/06/2017
  2. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 13/06/2017
  3. babucm babucm 13/06/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 13/06/2017

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