पिता का साथ

पिता का साथ उतना ही जरुरी होता हैं ,
जितना की माँ की ममता का आचल।
पिता का कंधा उतना ही जरुरी होता है
जितना माँँ का शगुन भरी गोद ।
जब गोद में सोलाय सोलाय तुम थक जाती थी,
तो पिता ही हमें अपने कंघे पर उठाते थे ।
जब माँ तुम किसी काम मे वयस्त रहती थी,
तो पिता ही हमें लोरी गा कर सुलाते थे ।
जब माँ तुम घर मे नहीं रहती थी,
तो पिता ही हमारे साथ खेलते थे ।
माँँ हमें अच्छे संस्कार डालती थी,
तो पिता आगे बढ़ने का सक्सेस मंत्र पढाते थे ।
पर माँ जब पिता पेड़ बन मजबूती से खरे रहते थे
तो तुम छाल की तरह लिपटी रहती थी उनमें ।
जब आता था कोई लकडहारा कुलहाडी़ लेकर
उस पर वार तो तुम गिरती थी सबसे पहले टुकड़े टुकड़े हो कर

10 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 11/06/2017
    • Bhawana Kumari Bhawana Kumari 14/07/2017
  2. SARVESH KUMAR MARUT SARVESH KUMAR MARUT 12/06/2017
    • Bhawana Kumari Bhawana Kumari 14/07/2017
  3. babucm babucm 12/06/2017
    • Bhawana Kumari Bhawana Kumari 14/07/2017
    • Bhawana Kumari Bhawana Kumari 14/07/2017
  4. Madhu tiwari Madhu tiwari 12/06/2017
  5. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 12/06/2017

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