कविता :– गॉव के नजारे भूल गये, अमन नैन

 

गॉव के नजारे भूल कर

आ गये शहरे मे

बढ गयी ख्वाइस

मिट गये रिश्ते

पैसे के चक्कर मे

छूट गये यार मित्र

छोड कर आसमान

कैद हो गये कमरो मे

चूल्हे रोटी जैसा स्वाद

गैस की रोटी मे ना रहा

स्वार्थ की दुनिया मे

जब से आया हूँ

बाहर से लगे अमीर पर

दिल का हो गया हूँ गरीब

भूले जमीन पर पैदल चलना

मोटर गाडी के आने से

माटी से हो गयी एलर्जी

माटी मे पैदा होने वाले को

गाँव की याद मे

अमन ने लिख दी कविता

अपनी जिंदगी पर भिती जो

कहानी सुना दी लोगो को

15 Comments

    • Aman Nain Aman Nain 10/06/2017
    • Aman Nain Aman Nain 03/07/2017
  1. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 10/06/2017
    • Aman Nain Aman Nain 10/06/2017
  2. Madhu tiwari Madhu tiwari 10/06/2017
    • Aman Nain Aman Nain 10/06/2017
  3. arun kumar jha arun kumar jha 10/06/2017
    • Aman Nain Aman Nain 10/06/2017
  4. SARVESH KUMAR MARUT SARVESH KUMAR MARUT 10/06/2017
    • Aman Nain Aman Nain 10/06/2017
  5. babucm babucm 11/06/2017
    • Aman Nain Aman Nain 11/06/2017
  6. डी. के. निवातिया dknivatiya 11/06/2017
    • Aman Nain Aman Nain 11/06/2017

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