राम की बाल लीला – मधु तिवारी

कृष्ण की बाल लीला को तो मानते हो
राम के बचपन को क्या तुम जानते हो

जैसे कृषणा बाल लीला मनमोहक है
वैसे ही राम का बचपन भी रोचक है

रामा बाल लीला की एक प्रसंग सुनाऊं
भाव विभोर हुए बिना मैं रह ना पाऊं

माँ कौशिल्या बालक को नहलाई धुलाई
कर सिंगार उसे पलना मे जाके सुलाई

पूजा हेतु फिर उसने पकवान बनाया
कुलदेवों को स्रद्धा से फिर भोग लगाया

गई माता बालक के पास तो देखा सोते
संतुष्ट हो आई वापस मन मे खुश होते

हुई आवाक जो देखा उसने पूजा घर को
भोजन करते पाया जब प्रभु लीलाधर को

वापस आई दौड़ते देखा तुरत पलना को
नींद मे सोते पाया वहीं पर ही ललना को

देखा इत उत उसने अपने सुत की काया को
समझ न पाई कौशिल्या प्रभु की माया को

मां को तब अपना वह असली रुप दिखाया
सोची माता जगत पिता को बेटा पाया

बेटा मुझको वचन ये दो तुम सुत ही रहना
व्यापक रूप को सदा अपने तक ही रखना

कहा तथास्तु राम ने फिर उन्हें सुलाया
उठने पर कुछ याद न आई सभी भुलाया

मधु तिवारी

22 Comments

  1. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 10/06/2017
  2. Kajalsoni 10/06/2017
  3. Bindeshwar prasad sharma bindeshwar prasad sharma 10/06/2017
  4. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 10/06/2017
  5. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 10/06/2017
  6. C.M. Sharma babucm 10/06/2017
  7. arun kumar jha arun kumar jha 10/06/2017
  8. SARVESH KUMAR MARUT SARVESH KUMAR MARUT 10/06/2017
  9. सोनित 10/06/2017
  10. डी. के. निवातिया dknivatiya 11/06/2017
    • Madhu tiwari Madhu tiwari 11/06/2017

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