गर्मी के बहाने

गर्मी के बहाने
नीले नीले अम्बर का अब तक कोई छोर नही
तपते सूरज को जो ढक दे एसी घटा घनघोर नही
ठंडी ठंडी जो हवा आ सके एसी कोई भोर नही
आसमां पर काली घटाओं का अब तक कोई शोर नही
आग उगलते सूरज को रोक सके एसी कोई डोर नही
लू के थपेड़ों मे जो नाच सके एसा कोई मोर नही
तर-बतर जो कर दे एसी झमाझम का दौर नही
पत्तियों की सरसराहट अब किसी ओर नही
कहत अनूप कविराय कूलर और एसी का चलता अब कोई जोर नही
(अनूप मिश्रा )

8 Comments

  1. Madhu tiwari madhu tiwari 10/06/2017
  2. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 10/06/2017
  3. Kajalsoni 10/06/2017
  4. Bindeshwar prasad sharma bindeshwar prasad sharma 10/06/2017
  5. C.M. Sharma babucm 10/06/2017
  6. SARVESH KUMAR MARUT SARVESH KUMAR MARUT 10/06/2017
  7. डी. के. निवातिया dknivatiya 11/06/2017

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