समर्पण…Raquim Ali

समर्पण

1.शादीशुदा के लिए:

उठने लगे तेरी क़लम जब एक नग़मा या खत लिखने
के लिए
सोच लो यह निस्बत-ए-माशूका है, या अहल-ए-खाना
के लिए।

हो कलाम किसी और पर, तो तोड़ देना तुम क़लम
हो जो अपने हमसफ़र पर, तो चूम लेना तुम क़लम।

जो तेरी जिंदगी का साथी हो, हो तेरा रफीक-ए-हयात्
उसे देखना प्रतिपल, पूरे का पूरा हो जाना उसके लिए।

किंचित दूर न होना, पलकों पे बिठा लेना, खप जाना
पूर्ण समर्पित हो जाना, तू मर-मिट जाना उसके लिए।

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2. ग़ैर शादीशुदा के लिए:

जो बने ‘की-पैड’ पर तेरे उंगलियों की लहर पे लहर
रुक कर सोच लेना अंजाम, और आने वाला कहर।

अभी बड़ा प्यारा लगेगा, स्क्रीन पर जो है उभरा हुआ
कल को कहीं घोल न जाए, तेरी जिंदगी में कोई ज़हर।

तुम दिखा सको अगर, अपने भाई-बहन, माँ-बाप को
तब, बात बिल्कुल ही सही है, वरना, तुम जाओ ठहर।

***** ***** ****** ****** ****** *****

3. सब के लिए:

जब कभी तुम माइल, किसी ग़ैर की तरफ होने लगो
फ़ौरन रुक जाना, और दिल में यह भाव भरने लगो-

‘मैं क्यों खिंचूं इसकी तरफ, यह नाजायज़ है मेरे लिए
मैं क्यों हो जाऊं इस पे फ़िदा, ए तो मौत है मेरे लिए।’

(निस्बत-ए-माशूका= प्रेमिका से सम्बंधित, अहल-ए-खाना=घर वाले,
कलाम=वर्णन, रफीक-ए-हयात्= जिंदगी का दोस्त, माइल=आकर्षित )
…र.अ. bsnl

11 Comments

  1. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 09/06/2017
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 09/06/2017
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 09/06/2017
  4. Bindeshwar prasad sharma bindeshwar prasad sharma 09/06/2017
  5. raquimali raquimali 09/06/2017
  6. Madhu tiwari madhu tiwari 09/06/2017
  7. arun kumar jha arun kumar jha 09/06/2017
  8. raquimali raquimali 10/06/2017
  9. Kajalsoni 10/06/2017
  10. raquimali raquimali 12/06/2017

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