Kabhi Hum Unko kabhi Apne Aap Ko Dekhte Hain

आप आए मुक्कदर  में हमारे ये खुदा की कुदरत है !
कभी हम आपको, कभी अपने आप को देखते हैं !
और शुक्रिया करते हैं उस खुदा का जिसकी आप रहमत हैं !!

कर रहे थे इक बूँद रहमत का इंतज़ार सदिओं से
और मिल गया है अब तो समंदर हमें
शुक्रगुजार हैं उस खुदा का हम जिसकी आप रहमत हैं!!

बेशकीमत दुआओं और फरियादों का असर हो तुम
ना जाने कितनी बार उठे थे हाथ तुम्हे मांग ने के लिए , उसकी बारगाह में
तब कंही जा कर खिला हैं ये फूल मेरे मुक्कदर में
कर रहे हैं तेरी सलामती की दुआ ऐ मेरे दोस्त उस रब से

बनकर रहमत अब यूँ ही अब बरसना तुम
सींच देना  मन की इस बंजर जमीं को अपने आगोश में लेकर
मुद्दतो की आरज़ू हो तुम, तरसे हैं ज़माने से तुम्हारे लिए
मिला हैं बो सकूँ मन को तुम्हे पाकर , कर नहीं पा रहे हैं बयां इन चंद लफ्जो में !!

बस खुश किस्मत समझते हैं हम तुम्हे पाकर
की कभी हम आपको, कभी अपने आपको देखते हैं
कुछ यूँ मशगूल हो गए हैं तेरे आने से ज़िंदगी
की अब सब कुछ छोड़ कर बस तुझे ही देखतें हैं — जिंदगी
बस तुझे ही सोचते हैं, तुझे और फिर अपने आप को देखतें हैं !!!

 

By Anderyas

6 Comments

  1. Anderyas Anderyas 06/06/2017
  2. babucm babucm 07/06/2017
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 07/06/2017
  4. Kajalsoni 07/06/2017
  5. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 07/06/2017
  6. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 07/06/2017

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