गीत- “धडकनों का मिलन”-शकुंतला तरार

गीत-  “धडकनों का मिलन”-

17-05-17

धड़कनों का धड़कनों से जब मिलन होगा

रात उजली और निखरती जाएगी ||

  • उँगलियों पर सात सुर जब सजते हैं

बांसुरी पर राग जब जब बजते हैं

बावरा मन पंख बिन परवाज़ होगा

सावनी संगीत तराने गाएगी ||

रात उजली और निखरती जाएगी ||

  • जब छलक जाएं घटाएं मदभरी

तब थिरक उठेगी गाँव की गोरी

बावरी उन्मुक्त इत-उत डोलेगी

पांवों पायल रुनझुनझुन सुनाएगी ||

रात उजली और निखरती जाएगी ||

  • नाम अधरों पर जो आते गुनगुनाते

स्वप्न पलकों आ-आकर फिर मुस्काते

जीवन महकाया है ढाई आखर ने

वो विधाता संग फिर मुस्काएगी ||

रात उजली और निखरती जाएगी ||

शकुंतला तरार

8 Comments

  1. RiteshK.Gupta RiteshK.Gupta 06/06/2017
    • shakuntala tarar 06/06/2017
  2. Ram Gopal Sankhla Ram Gopal Sankhla 06/06/2017
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/06/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 06/06/2017
  5. Kajalsoni 06/06/2017
  6. C.M. Sharma babucm 06/06/2017
  7. Madhu tiwari madhu tiwari 07/06/2017

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