मेरी कलम 6……..काजल सोनी

नाव मेरी नयी नयी ,
सागर वही पुराना था ।
इश्क की उन गलियों में जाना था ,
जिसका न ही कोई किनारा था ।
रुह थी खामोश मेरी ,
गुम सा होता हर एक नजारा था ।
अरे बड़ी दुर ढूंढ आई आज मैं उन्हें ,
पास जिनका आशियाना था ।

हाथों में हाथ थाम कर ,
मुझको साथ जो उनका निभाना था ।
पर कोई गवाह नहीं था मेरे इश्क का ,
सारा जहां लगा बस बेगाना था ।
हंसने लगे लोग आज वो सुनकर ,
जो मेरे लिए एक अफसाना था ।
तलाश फरिश्तो की मै करती रही हर पल ,
पर कोई क्यूँ हाथ बढ़ाता ,
बस मतलब का जो ये जमाना था ।।

” काजल सोनी ”

22 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/06/2017
  2. Kajalsoni 06/06/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 07/06/2017
      • Kajalsoni 09/06/2017
    • Kajalsoni 09/06/2017
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 06/06/2017
    • Kajalsoni 09/06/2017
  4. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 06/06/2017
    • Kajalsoni 09/06/2017
  5. Madhu tiwari madhu tiwari 06/06/2017
    • Kajalsoni 09/06/2017
  6. babucm babucm 06/06/2017
    • Kajalsoni 09/06/2017
  7. subhash 07/06/2017
    • Kajalsoni 09/06/2017
  8. Anderyas Anderyas 07/06/2017
    • Kajalsoni 09/06/2017
  9. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 07/06/2017
    • Kajalsoni 09/06/2017
  10. कमल "बिजनौरी" कमल "बिजनौरी" 08/06/2017
    • Kajalsoni 09/06/2017

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