एक सजा,,,,

एक सजा

मन में छाया खुमार सी
अपनी क़िस्मत तो बे-वफ़ा निकली
हर दिन तो था गमो का साया
हर शाम एक सजा निकली,,,,,,

अभी तो वफ़ा के गुलसन से आया
इन फूलों के रंगों को साथ लाया
अभी तो खुशियों के लिए दिल से दुआ निकली
और जिंदगी ही बे-वफ़ा निकली,,,,,,,

न काम आई कोई दवा
न काम आई कोई दुआ
भटक रहा था बे-वज़ह
ख़ुशी के सदके को छुपाता
चाहा गमों को सदा,,,,,,,,,,,

आँखों में जो भी था छुपा पाया
दिल के गमों को ना छुपा पाया
दिल के तले भटकता रहा ख़ुशी के लिए
पर जिंदगी हि बददुआ निकली
हर दिन तो था गमों से याराना
हर शाम एक सजा निकली,,,,,,,!!!

5 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 03/06/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 03/06/2017
  3. Bindeshwar prasad sharma bindeshwar prasad sharma 03/06/2017
  4. Kajalsoni 03/06/2017
  5. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 03/06/2017

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