निंदिया आरे,,,(कविता)

निंदिया आरे

आजा रे निंदिया आजा
दिल को चैन दिलाजा
कुछ पल सोए, कुछ पल रोए
फिर न याद दिलाजा
आजा रे निंदिया आजा,,,,,

फिरता है तू दर-बदर
कभी तो रैहम खा मेरे ऊपर
चाँदनी तू झूला बन जा
पवन बसंती लोरी सुना जा
रात है अंधेरी काली घटा
फिर तू सुबह: आ जा
आजा रे निंदिया आजा
दिल को चैन दिलाजा,,,,,

आँखों मे ना भाए काजल
आँसू ही दरिया बन जाए
याद न करू तुझे
फिर भी तू रोने का जरिया बन जा
ना मुझे कुछ भी भाए
हर पल याद करू मैं
एक बार तू सामने तो आजा
आजा रे निंदिया आजा
दिल को चैन दिलाजा,,,,!!!

10 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 03/06/2017
    • md. juber husain md. juber husain 01/09/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 03/06/2017
    • md. juber husain md. juber husain 01/09/2017
  3. Bindeshwar prasad sharma bindeshwar prasad sharma 03/06/2017
    • md. juber husain md. juber husain 01/09/2017
  4. Kajalsoni 03/06/2017
    • md. juber husain md. juber husain 01/09/2017
  5. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 03/06/2017
    • md. juber husain md. juber husain 01/09/2017

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