जो जलते हैं पर चलते हैं…!

उन जलते क़दमों से पूछो,
जो जलते हैं पर चलते हैं,
वो नहीं देखते दिन दुपहर,
बस सहते हैं, और चलते हैं ||

और पथ में कंकड़ चुभते हैं,
कभी शीशा है, कभी कांटे हैं,
है लथपथ पूरे कदम यहाँ,
नहीं रुकते हैं, बस चलते हैं ||

बाधाएँ हैं, विपदाएं हैं,
पर दिल को वो समझाएं हैं,
हम पा कर रहेंगे, कुछ भी हो,
वो गाते हैं, और चलते हैं ||

लोग कहते हैं, वो सुनते हैं,
पर अपने दिल की करते हैं,
जो ठान लिया है, निश्चित है,
वो कहते हैं, और चलते हैं ||

हम जानते हैं, क्यों करते नहीं,
क्यों उनके जैसे सहते नहीं,
गर पाना हैं, कुछ दुनिया में,
बस सहना है, और चलना है ||

— अरविन्द उपाध्याय —-

8 Comments

  1. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 02/06/2017
    • arvindupadhyayk 02/06/2017
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 02/06/2017
  3. Kajalsoni 02/06/2017
  4. SARVESH KUMAR MARUT SARVESH KUMAR MARUT 03/06/2017
  5. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 03/06/2017
  6. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 03/06/2017

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