जो तुम लौट आयी

मेरी नयी रचना
शीर्षक-जो तुम लौट आयी

मेरी ज़िन्दगी में
जो तुम लौट आयी
ऐसा लगा मानो
सूखे पेड़ो में फिर रौनक आयी
फिर से मुझपे तेरी मोहब्बत छायी
तुम्हारे जाने से
मेरी ज़िन्दगी में छा गया अँधेरा
मैं तो था
पर अपनी पहचान भूल गया
जो तुम लौट आयी
खुद को जानने लगा हूँ
तुम्हारा लौट आना
सुबह की नयी किरन सा है
पंछी के घर लौटने सा है
जो तुम लौट आयी
साँसों को साँस लेने का एहसास हुआ
जज्बातो का आगाज़ हुआ
प्यार अपने परवान पर हुआ
समन्दर के सीने पे लहरों का राज हुआ
दिल का फिर से दिल पे ऐतबार हुआ
जो तुम लौट आयी
ज़िन्दगी को ज़िन्दगी मिलने का एहसास हुआ
प्यार हुआ
बस प्यार हुआ —अभिषेक राजहंस

5 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 02/06/2017
  2. Kajalsoni 02/06/2017
  3. SARVESH KUMAR MARUT SARVESH KUMAR MARUT 03/06/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 03/06/2017
  5. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 03/06/2017

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