बस चलता ही रहूँगा…!

धूल से धुमिल है पथ,
फिर भी लेता हूँ शपथ,
ना रुकूंगा, ना थकूँगा,
बस चलता ही रहूँगा ||

ना आँधियों के जोर से,
ना बिजलियोँ के शोर से,
ना डरूँगा, ना रुकूंगा,
बस चलता ही रहूँगा ||

कितना ऊँचा हो मगर,
चाहे पर्वतों पर हो डगर,
ना गिरूंगा, ना रुकूंगा,
बस चलता ही रहूँगा ||

अब गहराइयों की बात है,
दरिया की, क्या अवकात है,
ना डूबूँगा, ना रुकूंगा,
बस चलता ही रहूँगा ||

लक्ष्य को है भेदना,
बस यही एक लक्ष्य है,
अभेद्य है तो क्या हुआ,
मैं भेद कर ही रहूँगा ||

धूल से धुमिल है पथ,
फिर भी लेता हूँ शपथ,
ना रुकूंगा, ना थकूँगा,
बस चलता ही रहूँगा ||

10 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 31/05/2017
    • arvindupadhyayk 02/06/2017
  2. Bindeshwar prasad sharma bindeshwar prasad sharma 31/05/2017
    • arvindupadhyayk 02/06/2017
  3. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 31/05/2017
    • arvindupadhyayk 02/06/2017
  4. Kajalsoni 31/05/2017
    • arvindupadhyayk 02/06/2017
    • arvindupadhyayk 02/06/2017

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