तुम अक्सर…… काजल सोनी

तुम अक्सर ,
मेरी हथेली थाम ,
अपनी हथेली पर रख जाते थे ।
एक कोमल और प्यारा अहसास ,
रगों में भर जाते थे ।

जब भी ,
होती थी मैं शर्मायी सी ,
वो प्रेम का दीया ,
जो बुझाये न बुझे ,
दिल में मेरे जला जाते थे ।
वो तुम्हारे भावों का संगम ,
जो मुझ नासमझ को ,
बाखूबी बहला जाते थे ।

मैं मिलाती थी नजरे ,
जब भी तुम्हारी नजरों से ,
कुछ देर तक तुम ,
प्यार भरी नजरों से मुझे निहार ,
खुद अपनी नजरें झुका जाते थे ।
यू तो हार जाने का बहाना करते,
सच तो ये था ,
कि आँखों में मेरे तुम आँसू न देख पाते थे ।

तुम अक्सर ,
मेरी आँखों से ओझल हो कर ,
मुझे सता जाते थे ।
मैं तुम्हें ढूँढती हर तरफ ,
शिकायतें करती ,
और तुम ,
दूर रहकर भी प्यार मुझसे निभा जाते थे ।।

“काजल सोनी “

20 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 29/05/2017
    • Kajalsoni 31/05/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 29/05/2017
    • Kajalsoni 31/05/2017
  3. babucm babucm 29/05/2017
    • Kajalsoni 31/05/2017
  4. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 29/05/2017
    • Kajalsoni 31/05/2017
  5. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 29/05/2017
    • Kajalsoni 31/05/2017
  6. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 29/05/2017
    • Kajalsoni 31/05/2017
  7. arun kumar jha arun kumar jha 29/05/2017
    • Kajalsoni 31/05/2017
  8. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 30/05/2017
    • Kajalsoni 31/05/2017
  9. kiran kapur gulati Kiran kapur Gulati 30/05/2017
    • Kajalsoni 31/05/2017
  10. subhash 30/05/2017
    • Kajalsoni 31/05/2017

Leave a Reply