मेरे दर्द से तुम वाकिफ़ तो नहीं

मेरे दर्द से तुम वाकिफ़ तो नहीं
वो गलिया अब मुनासिब तो नहीं

मेरी किस्मत में ना था ख़ुशी का किनारा
ये ग़म कि दुनिया ख्वाहिश तो नहीं

मेर दर्द से तुम वाकिफ़ तो नहीं
वो गलिया अब मुनासिब तो नहीं

ढूंढ़ता रहा दरिया में,कहि शाहिल तो नहीं
डुब जाने दें गम की नगरी भी

मेरे मुक़द्दर को कुछ हासिल तो नहीं
मेरे दर्द से तुम वाकिफ़ तो नहीं

वो गलिया अब मुनासिब तो नहीं
मेरी क़िस्मत में ना था खुशी का किनारा

ये गम की दुनिया ख़्वाहिश तो नहीं
कहाँ मिली रोशनी जिंदगी को

अंधेरा छाए तो बर्षो हुए
ता-उम्र मिले खुशी तुम्हें
तुम गम-ए-जिंदगी से वाकिफ़ तो नहीं

मेरे दर्द से तुम वाकिफ़ तो नहीं
वो गलिया अब मुनासिब तो नहीं

मेरी किस्मत में ना था ख़ुशी का किनारा
ये ग़म कि दुनिया ख्वाहिश तो नहीं

~~मु.जुबेर हुसैन

18 Comments

  1. babucm babucm 27/05/2017
    • md. juber husain md. juber husain 30/06/2017
  2. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 27/05/2017
    • md. juber husain md. juber husain 30/06/2017
    • md. juber husain md. juber husain 30/06/2017
  3. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 27/05/2017
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 27/05/2017
    • md. juber husain md. juber husain 30/06/2017
  4. md. juber husain md. juber husain 27/05/2017
  5. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 27/05/2017
    • md. juber husain md. juber husain 30/06/2017
  6. Kajalsoni 27/05/2017
    • md. juber husain md. juber husain 30/06/2017
  7. Madhu tiwari Madhu tiwari 27/05/2017
    • md. juber husain md. juber husain 30/06/2017
  8. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 27/05/2017
    • md. juber husain md. juber husain 30/06/2017

Leave a Reply