माँ-बाप

तले है जिसके बचपन खेला
तले है जिसके हुआ जवान
देख आँखों में आंसू आते
गिरता अब वो वृक्ष विशाल

जड़े है इसकी कितनी गहरी
कितने लम्बे इसके है शाख
चाहे धूप रहा या हो बारिश
हर पल लिया हमको है पाल

सूख रही अब इनकी टहनी
थाम न पाता खुद का भार
झुका हुआ ही करता सेवा
करता अब भी हमारा ख्याल

चाहे बाढ़ आया या आया तूफान
समेट लिया अपने तन से है ये
डिगा न तनिक अपने कर्मो से
चाहे कुदरत ने खेला कैसा भी खेल

17 Comments

  1. Bindeshwar prasad sharma bindeshwar prasad sharma 24/05/2017
    • vijaykr811 vijaykr811 24/05/2017
    • vijaykr811 vijaykr811 24/05/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 24/05/2017
    • vijaykr811 vijaykr811 24/05/2017
  3. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 24/05/2017
    • vijaykr811 vijaykr811 24/05/2017
  4. Madhu tiwari Madhu tiwari 24/05/2017
    • vijaykr811 vijaykr811 24/05/2017
  5. babucm babucm 24/05/2017
    • vijaykr811 vijaykr811 24/05/2017
    • vijaykr811 vijaykr811 24/05/2017
  6. Kajalsoni 24/05/2017
    • vijaykr811 vijaykr811 24/05/2017
  7. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 25/05/2017
    • vijaykr811 vijaykr811 25/05/2017

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