आज अकेले यूँ न तुम रहते – अनु महेश्वरी

अब क्यों रोए, भाग्य को अपने,
जब चेता नहीं कभी समय रहते|

सारा जीवन बिता दिया,
बस धन इकट्ठा करने में,
कभी न समय दे पाए,
मित्र और परिजन को,
न ही घर और बच्चो को,
अब, जब मिली है फुर्सत,
उन के पास समय नहीं है,
साथ तुम्हारे बिताने को|

अब क्यों रोए, भाग्य को अपने,
जब चेता नहीं कभी समय रहते|

सीखा जो घर से, वही ही,
आज अपनाया बच्चो ने भी,
वो भी बस मसगुल हुए है,
आज धन उपार्जन करने में,
उन के पास समय नहीं है,
अब साथ तुम्हारे बिताने को,
काश चेत पाते समय रहते,
आज अकेले यूँ न तुम रहते|

अब क्यों रोए, भाग्य को अपने,
जब चेता नहीं कभी समय रहते|

 
अनु महेश्वरी
चेन्नई

18 Comments

  1. Bindeshwar prasad sharma bindeshwar prasad sharma 22/05/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 22/05/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 22/05/2017
  2. C.M. Sharma babucm 22/05/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 22/05/2017
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 22/05/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 22/05/2017
  4. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 22/05/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 22/05/2017
  5. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 22/05/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 22/05/2017
  6. Raquim Ali 22/05/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 22/05/2017
  7. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 23/05/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 23/05/2017
  8. Madhu tiwari Madhu tiwari 23/05/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 23/05/2017

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