लौट आओ मेरी प्यारी

लौट आओ मेरी प्यारी

आज फिर याद आई तुम्हारी ,
तो लगा फिर से मैं सोचने,
क्यों …आखिर क्यों करुँ मैं इंतज़ार तुम्हारा
तुम तो भूला बैठे हो इस पागल को
जो जी रहा था एक आस के सहारे!!

दर्द जो तुमने दिए हैं बन गए हैं नासूर अब तो
चाहा कर भी नहीं भुला पाए हैं तुमको
जी रहे हैं उन नासूरों को लिए हुए
समझ कर, तेरा गहना उनको!!

गर है तू मेरी किस्मत मैं अब भी अगर
खुदा कसम क़यामत तक तेरा इंतज़ार करता
पर ये खूबसूरत सपना काश हकीकत होता
काश ये हकीकत होता ……..तो होती मेरी मुक्कमल बो दुआ!!

बड़े नाज़ो से माँगा था तझे उस रब से मैंने
थी उसकी नज़रे करम मुझ पर
डल दिया था उनसे मेरी झोली मैं तुझको
मगर तुम तो न जाने किस मुकाम की तलाश मैं थे की मंजिल से आगे निकल गए
खड़े हूँ आज भी उस मोड पर जंहा से तुमने लिए रास्ते बदल!!

दुआ करते हूँ तुम्हारे रास्ते मैं भटक जाने की
और फिर से वापस लोट आने की
शायद फिर से मुलाकात हो जाये दो भटको हुऐ राहगीरों की
एक जो प्यार में भटका और दूसरा अपने गरूर में !!

8 Comments

  1. Anderyas Anderyas 22/05/2017
  2. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 22/05/2017
  3. babucm babucm 22/05/2017
  4. Bindeshwar prasad sharma bindeshwar prasad sharma 22/05/2017
  5. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 22/05/2017
  6. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 23/05/2017
  7. Madhu tiwari Madhu tiwari 23/05/2017

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