एहसाास वर्षा का


पेड़ -पौधें लहराते
हवाओं में,
बिजली चमकती
बादालो में,
मैं भी घिर गया
तूफ़ानो मे,
कट रहे थे पल
मुश्किलों में।

कोई पूछे हाल हमारा
यही आश लगा
हम बैठे थे ,
याद आ रही अपनो की
बस रब को याद किये
जा रहे थे ,
गरजते -गरजते बादल
पानी का पेगा़म
बता रहे थे ,
छुआ हृदय तो
खुशी का जाम
पिला रहें थे।

25 Comments

  1. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 21/05/2017
    • Rishi K.C. 21/05/2017
  2. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 21/05/2017
    • Rishi K.C. 22/05/2017
  3. C.M. Sharma babucm 22/05/2017
    • Rishi K.C. 22/05/2017
  4. Bindeshwar prasad sharma bindeshwar prasad sharma 22/05/2017
  5. Rishi kc 22/05/2017
    • Rishi kc 22/05/2017
  6. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 22/05/2017
    • Rishi kc 22/05/2017
  7. Rishi kc 23/05/2017
  8. C.M. Sharma babucm 24/05/2017
    • Rishi kc 24/05/2017
  9. prinku 22/06/2017
    • Rishi 29/06/2017
  10. Akash 02/08/2017
  11. Raman 02/08/2017
  12. Rishi K.C. 02/08/2017
  13. Sonu singh 02/08/2017
  14. Ritesh 02/08/2017