ग़म से नहीं मरता

भरी महफिल में मैं तुझको यू रुस्वा क्यों नहीं करता,
जो तूने गम दिए हैं उनको साझा क्यों नहीं करता,
यह मोहब्बत है कोई खेल नहीं गुड्डू गुड़ियों का,
अगर तुम समझ लिए होते तो मैं ग़म से नहीं मरता।।

6 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 21/05/2017
  2. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 21/05/2017
  3. C.M. Sharma babucm 21/05/2017
  4. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 21/05/2017
  5. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 22/05/2017

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