कुछ अनसुलझे जिंदगी के पन्नो ने आज साथ छोड़ दिये

कुछ अनसुलझे जिंदगी के पन्नो ने आज साथ छोड़ दिये
कल जो नया था, आज उसी को कल मे फेर दिये
कुछ अनसुलझे जिंदगी के पन्नो ने आज साथ छोड़ दिये- २

कुछ तो बात हम सब मे थी; कभी चाहते, ना चाहते भी साथ चल दिये,
किसी से लड़े भी, किसी से जुड़े भी; कन्ही कम, कन्ही ज्यादा आगे बढ़ दिये,
कुछ अनसुलझे जिंदगी के पन्नो ने आज साथ छोड़ दिये

जिस हौसले से उड़ान भर के देश को छोड़ा था,
आज भी कन्ही दिल मे दर्ज, उस उड़ान को ताजा कर दिये,
कुछ अनसुलझे जिंदगी के पन्नो ने आज साथ छोड़ दिये

कुछ सिखना है, कुछ सिखाना है, जो पाया है, उससे बेहतर लौटाना है,
शायद इसी की जद्दो जहद मे, हर बार नयी राह पे चल दिये,
कुछ अनसुलझे जिंदगी के पन्नो ने आज साथ छोड़ दिये

6 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 21/05/2017
  2. SARVESH KUMAR MARUT sarvesh kumar marut 21/05/2017
  3. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 21/05/2017
  4. babucm babucm 21/05/2017
  5. Surajkumar Gupta 29/06/2017

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