ओ! नन्हें बादल के टुकड़े

ओ! नन्हे बादल के टुकड़े,  

ज़रा एक झलक दिखला जाना।

देखो गर्मी पड़ी भयानक,

आकर इसको टहला जाना।

अम्बर बना है आग की थाली,

अपने दोस्तों के साथ तुम मिलकर।

जैसा हो और जितनी जल्दी ,

इसको आकर बहला जाना।

जीभ निकाली है सूरज ने,

देखो हम सब को खाने को।

फटी जा रही है यह धरती,

और हॉफ रहा है यह जग सारा।

ओ! नन्हें बादल के टुकड़े,

 बस आकर हमें बचा जाना।

तेरा इस अम्बर से कुछ तो,

 कुछ ना कुछ याराना होगा।

आजा-आजा, आजा -आजा;

 आकर इसे समझा बुझा जाना।

माना तू छोटा और नन्हा है,

पर रुक- रुक कर थोड़ा-थोड़ा।

झटपट- झटपट तू आकर हम पर,

थोड़ी हम पर छांव लगा जाना।

ओ! नन्हें बादल के टुकड़े,

थोड़ी दयादृष्टि बरसा जाना।

तू जाने बस तू जाने,

और कोई क्या अब जाने?

तेरा काम कुछ छाया देना,

और तेरा कर्म है बरसाना।

ओ! नन्हें बादल के टुकड़े,

तुम हमारे मन को पढ़ जाना।

वृक्ष भी देखो लटक पड़े हैं,

और फ़ूट पड़ी उनसे ज्वाला।

जीव- जन्तु भी तड़प उठे अब,

यहाँ भागा बस वहाँ भागा।

ओ! नन्हे बादल के टुकड़े,

तू थोड़ी करुणा दिखला जाना।

बचा नहीं अब शेष जरा भी,

चाहे तालाब या हो कुँआ।

मरे-मरे हाय मरे- मरे सब,

और क्षीण हो चले हैं नैना।

ओ!नन्हें बादल के टुकड़े,

जरा आँखों को तो भर जाना।

ओ! नन्हें बादल के टुकड़े,

तू हम पर आकर रो जाना।

                  सर्वेश कुमार मारुत

9 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 18/05/2017
    • SARVESH KUMAR MARUT SARVESH KUMAR MARUT 18/05/2017
  2. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 18/05/2017
    • SARVESH KUMAR MARUT SARVESH KUMAR MARUT 18/05/2017
  3. Bindeshwar prasad sharma bindeshwar prasad sharma 18/05/2017
  4. babucm babucm 19/05/2017
  5. Madhu tiwari Madhu tiwari 19/05/2017
  6. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 20/05/2017
  7. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 21/05/2017

Leave a Reply