उड़ान

उड़ना चाहती हूँ
इस खुले आसमान में
उन परिंदों की तरह
अपनी मंजिल को छुने की
ख्वाहिश लेकर…

क्यों रोक लेता है फिर कोई
इस उडती चिड़ियाँ को
क्यों बंद कर देते हो अपनी सोच के
इस छोटे से पिंजरे में…

कैद कर देते हो उस बेजुबान पंछी को जैसे
कोशिश न करना मुझे कैद करने की
पिंजरे को तेरे तोड़ कर निकल जाऊँगी…

देखना फिर मुझे
उस खुले आसमान में
उडती हुयी नज़र आऊँगी।

6 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 17/05/2017
  2. C.M. Sharma babucm 17/05/2017
  3. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 17/05/2017
  4. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 17/05/2017
  5. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 17/05/2017

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