एक तरफा प्यार

एक तरफा प्यार

अरूणोदय से अस्ता‍चल दिवस रवि से फलता है
समय का यह कारवां यूं ही अनवरत चलता है
दिल में हजारों अरमां लिए बैठे हैं ऐसी कश्ती में
देखते हैं मांझी डुबाता है या पार ले चलता है
यूं तो मिलते हैं दुनियां में कई जाने-अनजाने
यह दिल कभी-कभी ही किसी के लिए मचलता है
रोशनी के लिए जलते तो हैं तेल और बाती
कहने वाले कहते हैं देखो दीपक जलता है
सिलसिला पैगामों का चलता ही चला लेकिन
मजा तो तब है जब उधर से भी जवाब मिलता है
सोचा बन्द करूं लिखना उनकी बेरूखी देखकर
फिर भी जाने क्यूं कलम खुद ब खुद ही चलता है
अब तरस गए हैं हम उस अनाम अहसास के लिए
उस अपनापन का कहीं कुछ तो मतलब निकलता है
जमाना तो रंग दिखाता है यूं मौसम के साथ
क्यों अपना हमदम भी इस तरह बदलता है
वो पूछते हैं यह मोहब्बत है या शायरी शायर की
यह काव्य प्रसून तो प्रेम-वाटिका में ही खिलता है
संकेत दिया उन्होंने इस दोस्ती को प्यार ना समझना
एक तरफा प्यार ‘गोपी’ आखिर कितना चलता है

रामगोपाल सांखला ‘गोपी’

8 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 17/05/2017
    • Ram Gopal Sankhla Ram Gopal Sankhla 22/05/2017
  2. babucm babucm 17/05/2017
    • Ram Gopal Sankhla Ram Gopal Sankhla 22/05/2017
  3. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 17/05/2017
    • Ram Gopal Sankhla Ram Gopal Sankhla 22/05/2017
    • Ram Gopal Sankhla Ram Gopal Sankhla 22/05/2017

Leave a Reply