गुलशन में चंद कलियाँ…

गुलशन में चंद कलियाँ अभी भी बाक़ी हैं,
ख्वाहिश वो उनसे मिलने की अभी भी बाक़ी है |

जलाया था ये सारा शहर किसी ने कभी,
शहर में राख औ दिल में आग अभी भी बाक़ी है |

हर एक शै पे उठ चुकीं ज़माने की उँगलियाँ,
बदनाम होना बस इक तिरा अभी भी बाक़ी है |

मौसम बदल गए हैं तुमसे मिले हुए,
जाड़े की धूप का मज़ा अभी भी बाक़ी है |

अशआर तो लिखे हैं “आलेख” ने तमाम,
ग़ज़ल जो मुकम्मल हो अभी भी बाक़ी है |

 

— अमिताभ आलेख

7 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 16/05/2017
    • आमिताभ 'आलेख' आमिताभ 'आलेख' 16/05/2017
  2. Bindeshwar prasad sharma bindeshwar prasad sharma 16/05/2017
  3. vijay kumar singh 16/05/2017
  4. babucm babucm 16/05/2017
  5. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 16/05/2017
  6. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 17/05/2017

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