तेरी यादों के साये – शिशिर मधुकर

गरम लू के थपेड़े भी बदन को ना जलाते हैं
तेरी उल्फ़त के नगमों को जब भी हम गुनगुनाते हैं

तू हँसती है तो लाखो फूल मिलकर खुशबू देते हैं
जिसमें मदहोश हो के भंवरे अपना ग़म भुलाते है

ना हीरों से ना पन्नों से ना शोहरत से ना महलों से
खुशी मिलती है हमको जब तेरे पहलू में आते है

मुहब्बत करना आसां है निभाना है बहुत मुश्किल
अपनी हर बात लेकिन हम तो शिद्दत से निभाते हैं

भले ही धूप छाई हो और अँधेरे पास ना आएं
तेरी यादों के साये लेकिन हमें अब भी सताते हैं

शिशिर मधुकर

19 Comments

    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 16/05/2017
  1. Bindeshwar prasad sharma bindeshwar prasad sharma 15/05/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 16/05/2017
  2. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 15/05/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 16/05/2017
  3. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 15/05/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 16/05/2017
  4. babucm babucm 16/05/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 16/05/2017
  5. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 16/05/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 16/05/2017
  6. Ashish Awasthi Ashish Awasthi 16/05/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 16/05/2017
  7. आमिताभ 'आलेख' आमिताभ 'आलेख' 16/05/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 16/05/2017
  8. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 16/05/2017
  9. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 16/05/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 17/05/2017

Leave a Reply