|| माँ एक अहसास ||

जग कहता यह माँ का दिन है माताओं को करो प्रणाम |
पर मेरा है यह कहना यह जीवन हे है माँ के नाम || 1 ||
जीवन यात्रा के दिवस रात्रि हों या हों माह वर्ष दो कुछ भी नाम |
सबका कारण होती माता नित प्रति उसको करो प्रणाम || 2 ||
चरण रज माँ की रखो शीष पर ईश्वर का यह दूजा नाम |
जग को जिसकी गोद से देखा ‘माता’ ही है उसका नाम || 3 ||
एक खुशी के लिए हमारी जिसने सर्वस्व किया निछावर |
हमारी खुशियों की मन्नत माँगी दर दर पर ठोकर खाकर || 4 ||
अपनी खुशियाँ त्यागी जिसने कि मेरी संतान प्रसन्न रहे |
सारे कष्ट लिए अपनी झोली में कि संतान सदा सम्पन्न रहे || 5 ||
उस माँ के गुणगान हेतु क्या वर्ष का एक दिवस होता पर्याप्त |
जिसकी करुणा की शीतल छाँव जीवन पर्यन्त न होती समाप्त || 6 ||
ईश्वर भी माँ के आंचल की छाँव पाने की इच्छा रखते |
माँ की करुणा हेतु देवता भी जन्म लेने हेतु तरसते || 7 ||
राम ने भी अवतार लिया माँ के समक्ष नतमस्तक हुए |
कृष्ण ने भी की लीलाएँ माता को नमन किये हुए || 8 ||
माता को केवल याद करने से कर्तव्य नहीं होता है पूर्ण |
ह्रदय में श्रद्धा रखते भाव सकल होते परिपूर्ण || 9 ||
माँ की सेवा का सौभाग्य जग में भाग्यवान ही पाते हैं |
माँ की चरण रज का लेपन कर जीवन धन्य बनाते हैं || 10 ||
माँ के जाने के बाद भी अहसास सदा रहता है साथ |
आज भी हमारे संग है माता रखे शीष पर अपना हाथ || 11 ||
मेरी माँ भी जा चुकी इस नश्वर जगत से बहुत दूर |
किन्तु उपस्थिति का अहसास सदा ही मिलता है मुझको भरपूर || 12 ||
माता की सेवा कर ले मनुष्य मन्दिर जाने का नही काम |
रामायण गीत्ता वेद यहीं पर माँ के चरणों में चारों धाम || 13 ||
माँ विद्यमान इस लोक में या हो गयी हो परलोक की वासी |
अनुभव तुम उसको कर सकते जब भी जब भी हो जाते अभिलाषी || 14 ||
अखिलेश प्रकाश श्रीवास्तव

7 Comments

  1. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 15/05/2017
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 15/05/2017
  3. Bindeshwar prasad sharma bindeshwar prasad sharma 15/05/2017
  4. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 15/05/2017
  5. अखिलेश प्रकाश श्रीवास्तव अखिलेश प्रकाश श्रीवास्तव 15/05/2017
  6. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 16/05/2017

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