“कविता  नहीं  आवाज  हूँ,मैं एक नई कहानी,सुनाता  हूँ,मैं”-ऋषि के.सी.

एक नई कहानी ,सुनाता हूँ मैं,
एक नई कहानी,सुनाता हूँ मैं,

रहता वो डूबते सागर में ,

एक नई………………..मैं ।

चिड़िया-सी कहानी है उसकी ,

उड़ता वो-फिरता जीवन की ,तालाश में,

एक नई……………….मैं।

अपने भी थे उसके ,सपने भी थे उसके,

पंखों में उड़न भरी भी उसने ,

रास्ते में चलता भी था और गिरता भी था,

बदनामी को वो चुपचाप सह जाता था ,

परन्तु सबका मान बढ़ाता था ,

एक नई………………………मैं ।

अपना खुदा भी था और उससे जुदा भी था ,

कहने से वो कतराता भी था,

और हृदय में उसको बसाता भी था,

आज भी कहानियों में ,उसको ढूंढता भी था ,

किस्मत का संदेश,मानता भी था वो उसको,

अंत में सीखा गई ,दोस्ताना उसको,

रह गई आखिरी ख़्वाइश,कहने को उसको ,

याद करता रहेगा, जीवन के पथ पर उसको ,

नही पसंद करता वो ,अफसाना उसका ,

सिर्फ सपनो में ,ढूंढ़ता था उसको ,

यही जीवन_का_सार ,बताता हूँ मैं ,

एक नई कहानी, सुनाता हूँ मैं ,

एक नई कहानी ,सुनाता हूँ मैं ।

-ऋषि के.सी.

12 Comments

  1. mani ranjan 13/05/2017
  2. sumit 13/05/2017
    • Rishi K.C. 13/05/2017
  3. aman 14/05/2017
  4. C.M. Sharma babucm 15/05/2017
  5. TRILOK mandal 15/05/2017
  6. Sabita 19/05/2017

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