एक सैनिक की गाथा – अनु महेश्वरी

सभी की तरह मैंने भी घर छोड़ा था,
कुछ बनने के लिए, कुछ काम करने के लिए,
कड़ी मेहनत के बाद, नौकरी भी मिल गयी थी,
मैंने भी कर्तव्य निष्ठा से अपना काम किया,
मेरे कंधे पे कुछ स्टार्स भी लग गए,
एक माँ की रक्षा के लिए,
मै, एक माँ से दूर रहा,
मै भी, औरो की तरह,
एक दिन लौट कर घर वापस आया,
फर्क बस इतना था,
मेरे घर वाले मुझसे,
गले न मिल सके,
रोये भी बहुत थे वह,
पर मै उनके आंसू, न पौंछ सका,
क्योकि मै तिरंगे में लिप्टा हुआ,
मेडल्स अपने छाती पे लिए,
अपनी अंतिम यात्रा के लिए,
क़फन में बंद हो, लौटा था,
मेरी जीवनयात्रा समाप्त हो चुकी थी,
भारत माँ की रक्षा करते हुए|

 
अनु महेश्वरी
चेन्नई

18 Comments

    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 13/05/2017
  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 13/05/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 13/05/2017
  2. Aman Nain Aman Nain 13/05/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 13/05/2017
  3. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 13/05/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 13/05/2017
  4. Bindeshwar prasad sharma bindeshwar prasad sharma 13/05/2017
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  5. arun kumar jha arun kumar jha 13/05/2017
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  6. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 13/05/2017
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  7. Rishi kc 13/05/2017
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  8. babucm babucm 15/05/2017
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