रात ख़त्म कहाँ हुई है….सी.एम्. शर्मा (बब्बू)….

(2122 x 3 प्रभावित )

फिर उसे मैं यूं बुलाने जा रहा हूँ….
मौत का पैगाम लेने जा रहा हूँ…

रात ख़त्म कहाँ हुई है आज मेरी…
शहर में सूर्य उगाने जा रहा हूँ….

अब न होगी दर्द रुके की प्रतीक्षा …
खुद-ब-खुद ही दिल जलाने जा रहा हूँ…

वक़्त की आगोश में सब फंस जाते…
हो तुम मुसाफिर बताने जा रहा हूँ….

ये ज़मीं तेरी न मेरी थी कभी चँद्र..
फिर क्यूँ अपनी बनाने जा रहा हूँ…
\
/सी.एम्. शर्मा (बब्बू)

14 Comments

    • babucm babucm 15/05/2017
  1. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 11/05/2017
    • babucm babucm 15/05/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 11/05/2017
    • babucm babucm 15/05/2017
  3. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 11/05/2017
    • babucm babucm 15/05/2017
  4. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 12/05/2017
    • babucm babucm 15/05/2017
  5. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/05/2017
    • babucm babucm 15/05/2017
  6. Kajalsoni 26/05/2017
    • babucm babucm 26/05/2017

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