दक्षिणभर बैठी बेचूआ की माई-

दक्षिणभर बैठी बेचूआ की माई-
ताक रही है लगातार
बरस बीते
बरसात गई,
घुरना जो गया
लौटा नहीं।
सुना है-
उसकी एक सुन्नर पतोहू है,
सेवा टहल करती,
उमीर गुजर रही है।

2 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 11/05/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 11/05/2017

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