माँ

Today is Mother’s Day

माँ

 

माँ ! तू अंनत नभ में उड़ती जाती है

मुख में दाना, पंखों में ममता भर लाती है।

नभ के किस कोने से, किससे मिलकर

ममता की बूँदों की प्रिय क्षमता भर लाती है।

 

हमको भी पर दे, उड़ने की चाहत दे

हम भी उड़ें गगन में तेरे पंखों से गति पाकर

बतला कौन है वहाँ अनंत में बैठा

जिसके कुँज से तू यह चेतना भर लाती है।

 

देकर अनुपम प्रेमाश्रू सबकी माँ को

है किसका आँचल जो हरदम गीला रहता है।

बतला दे माँ वह दाता कौन कहाँ है

जिससे मिल तू भी अपना प्याला भर लाती है।

 

माँ ! तू अंनत नभ में उड़ती जाती है

मुख में दाना, पंखों में ममता भर लाती है।

नभ के किस कोने से, किससे मिलकर

ममता की बूँदों की प्रिय क्षमता भर लाती है।

—- भूपेन्द्र कुमार दवे

00000

5 Comments

  1. ऋषि के.सी. Rishi K.C. 11/05/2017
  2. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 11/05/2017
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 11/05/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 11/05/2017

Leave a Reply