असल पैगाम – शिशिर मधुकर

जिन आँखों में मुहब्बत का नशीला जाम मिलता है
उन्हीं सीनों से लगने में ही तो आराम मिलता है

जुबां का क्या करोगे झूठ वो तो कह ही सकती है
नज़र से ही तो इस दिल का असल पैगाम मिलता है

नशा गर ना करे इंसान तो ये जीवन कटे कैसे
घर उसको लौटकर वीराना जब हर शाम मिलता है

बीज बोते हो तुम जैसे फ़सल वैसी ही होती है
नफ़रत का तो नफ़रत ही बस इक अंजाम मिलता है

ज़माने की बातों का ना तू विश्वास कर साथी
बढ़िया आदमी ही अक्सर यहाँ बदनाम मिलता है

शिशिर मधुकर

15 Comments

  1. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 10/05/2017
  2. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 10/05/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 10/05/2017
  3. Ashish Awasthi Ashish Awasthi 10/05/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 10/05/2017
  4. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 10/05/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 11/05/2017
  5. Kajalsoni 11/05/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 11/05/2017
  6. babucm babucm 11/05/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 11/05/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 11/05/2017
  7. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 12/05/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/05/2017

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