भेद सारे ख़त्म हुए – शिशिर मधुकर

मुहब्बतें तुमसे मेरी जान कम नहीं होंगी
चाहे साँसें मेरी ये धीमे से थम रही होंगी

बदलती ऋतु में सबका मिजाज बदलेगा
बहती नदियां भी पर्वतों में जम रही होंगी

किसी का चेहरा सदा दर्द बता सकता नहीं
जाने कितने समय आँखें ये नम रही होंगी

आज तनकर सबके सामने गर वो चलता है
ये ज़रूरी तो नहीं सब राहें सुगम रही होंगी

मुहब्बत हो गई जब ये भेद सारे ख़त्म हुए
वरना पहले पहल झिझक शरम रही होंगी

शिशिर मधुकर

16 Comments

  1. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 08/05/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 09/05/2017
  2. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 09/05/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 09/05/2017
  3. babucm babucm 09/05/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 09/05/2017
  4. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 09/05/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 09/05/2017
  5. raquimali raquimali 09/05/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 09/05/2017
  6. Kajalsoni 09/05/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 09/05/2017
  7. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 09/05/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 09/05/2017
  8. RiteshK.Gupta RiteshK.Gupta 09/05/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 09/05/2017

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