“कुरजां”

सुदूर उत्तरी‎ छोर पर
जब घनी बर्फ जमती है तो मरूभूमि में
साइबेरियन सारस आते हैं
और उसके लिए तुम्हारा ख़त।

दुर्लभ हैं वे
साल में एक बार आते हैं
बिछड़ अपने कारवां से
किसी विरहिणी की ‘कुरजां’बन जाते हैं।

मासूम सी थी वो
तुम्हारा ख़त पा निहाल हो जाती थी
कभी मन्दिर में फूल सा चढ़ा तो
कभी इबारत पर अंगुली फिराती थी।

अपनी जरूरतों के मुताबिक
वे एक बार जरूर आते हैं
उसके लिए फटे पुराने ख़त में लिखे अक्षर
उसकी व्यथा सुनने वाली ‘कुरजां’ बन जाते हैं।

“मीना भारद्वाज “

13 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/05/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/05/2017
      • Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 09/05/2017
  2. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 09/05/2017
    • Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 09/05/2017
  3. C.M. Sharma babucm 09/05/2017
  4. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 09/05/2017
  5. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 09/05/2017
    • Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 09/05/2017
  6. Kajalsoni 09/05/2017
    • Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 09/05/2017
  7. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 09/05/2017
    • Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 09/05/2017

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