बेसुध हुए हम… Raquim Ali

हमने देखा, चोरों की बस्ती में मस्ती बहुत थी
थोड़ा सहमे, सुर में सुर हम भी मिलाने लगे थे;
तमाशाई बने पहले तो, दूर-दूर ही हम खड़े थे
जाने कब, गीत ग़फलत के हम भी गाने लगे थे।

झूमकर नाचे, गैरों को भी हम नचाने लगे थे
हम भी रंग-बिरंगी महफ़िलें सजाने लगे थे
मिल गए जल्द, ताल में ताल हमारे भी उनसे
मस्ती में अपनी हस्ती को, हम मिटाने लगे थे।

पहुंच कर वहाँ, जी भरकर हम भी पी लिए थे
औरों को भी हम, बड़ी अदा से पिलाने लगे थे;
देखते-देखते, हम भी उनसे हिल-मिल से गए थे
बेसुध हुए हम, बेहद अच्छे उनके तराने लगे थे।

आंखें खुलीं तो सूना-सूना सा लग रहा था
सन्नाटा था बहुत, सब कुछ बिखरा पड़ा था;
न कोई वहां था, हम अकेले-अकेले पड़े थे
मद के नशे में, अपनों को जो हटाने लगे थे;

सांसें थीं आखिरी, वक्त भी गुजर चुका था
लुटे से थे हम, कुछ भी नहीं बच सका था;
एक मकसद था जो, मेरे आने का इस जहां में
यूं तो भूले से थे, अब और हम भुलाने लगे थे।

… र.अ. bsnl

13 Comments

  1. babucm babucm 08/05/2017
  2. raquimali raquimali 08/05/2017
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/05/2017
  4. Raquim Ali 08/05/2017
  5. raquimali raquimali 08/05/2017
  6. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 08/05/2017
  7. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 09/05/2017
  8. raquimali raquimali 09/05/2017
  9. Kajalsoni 09/05/2017
  10. raquimali raquimali 09/05/2017
  11. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 09/05/2017
  12. raquimali raquimali 11/05/2017
  13. PALAK 11/05/2017

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