सरदार (कविता)

मैं तो हु हवा,छूकर गुजर जाऊँगा
गुजर गया तो, आँधी मैं कहलाऊँगा
मैं तो हु एक मस्त बहार
नजरों से भी आए प्यार
मैं तो हुँ सरदार,,,,,,,,,,,,,,2

समस्त गोकुल का मैं तो ग्वाला
हरि नाम का जाप लगाए
प्यार मिले उपहार या
तीर चले या तलवार
मैं तो हुँ सरदार,,,,,,,,,,,,,2

दुनिया की तो बात नूरानी
हो ईद या दीवाली
कहि हो गमो का खुमार
मैं तो हुँ सरदार,,,,,,,,,,,2

युद्ध का बिगुल बजे या
बजे बाँसुरी की ताल
आये बड़े-बड़े सम्राट
होकर घोड़े पर सवार
फ़िके पड़ गए सिक्के वार
मैं तो हुँ सरदार,,,,,,,,,,,2

**~~~मु.जुबेर हुसैन

3 Comments

  1. babucm babucm 08/05/2017
  2. md. juber husain md. juber husain 09/05/2017
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 09/05/2017

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