जब न लिखू

जब न लिखू तो ,
खुद से रूठे लगते है .
खुद में टूटे टूटे से लगते है .
ये कलम चुप होकर,
उदास सी हो जाती है .
अपनी चलती रहो से,
दूर चली जाती है.
जब न लिखू तो ,
दुनिया खूबसूरत लगती नहीं है ,
और चलती रहो में ,
उलझी सी रहती है  

anjali yadav

3 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 07/05/2017
  2. babucm babucm 07/05/2017
  3. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 08/05/2017

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